Bashir Badr Passes Away: नहीं रहे मशहूर शायर बशीर बद्र; याददाश्त खो चुके थे, जिंदगी के अंतिम दौर में अपने ही लिखे शेर भूले

नहीं रहे मशहूर शायर बशीर बद्र; याददाश्त खो चुके थे, जिंदगी के अंतिम दौर में अपने ही लिखे शेर याद नहीं रहे, UP से रहा खास ताल्लुक

Famous Indian Poet Bashir Badr Passes Away In Bhopal At Age 91

Famous Indian Poet Bashir Badr Passes Away In Bhopal At Age 91

Bashir Badr Passes Away: भारत के मशहूर शायर डॉ बशीर बद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरुवार (28 मई) को 91 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। बशीर बद्र ने भोपाल स्थित अपने आवास पर जिंदगी की आखिरी सांस ली। बशीर बद्र उर्दू जुबां और गजल के सबसे चमकदार सितारे रहे। उनका जाना उम्दा लेखन के एक युग का अंत है। उनके जाने से देश-विदेश में मौजूद उनके लाखों प्रशंसकों और चाहने वालों में मायूसी छा गई है। बशीर बद्र की कलम में गज़ब की जादुई ताकत थी।  

बशीर बद्र वो शख्स रहे, जिन्होंने उर्दू जुबां में अदब को बरकरार रखते हुए उसके भारी-भरकम शब्द हिन्दी के साथ पिरोए और सरल व बेहद रूमानी तरीके से लोगों के दिलों तक उतार दिए। यही कारण रहा कि उनके शेर आम आदमी की बोलचाल का हिस्सा भी बने। अपनी शेरो-शायरी से पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान का परचम लहराने वाले बशीर बद्र साहब को हमेशा याद किया जाएगा। उनके शेर, उनकी गजलें लोग अपने दिलों और जहन से कभी नहीं नहीं पाएंगे। बशीर बद्र ने ज़िंदगी, संघर्ष, इंसानी जज्बातों और मोहब्बत पर खूबसूरत सलीके से शेर लिखे।

Famous Indian Poet Bashir Badr Passes Away In Bhopal At Age 91

जिंदगी के अंतिम दौर में अपने ही लिखे शेर भूले

बशीर बद्र लंबी समय से बीमार चल रहे थे और 91 साल की इस उम्र में अपने आखिरी दिनों को जीते हुए वह अपने ही लिखे शेर भूल गए थे। दरअसल जीवन के इस अंतिम दौर में बशीर बद्र डिमेंशिया के शिकार हो गए थे और अपनी याददाश्त खो चुके थे। लेकिन बताया जाता है कि अचानक से कभी-कभी मुशायरे की याद आने पर वे इरशाद-इरशाद कहने लगते थे। वहीं बशीर बद्र की यादों में उनके शेर जिंदा रहें, इसके लिए उन्हें उनके शेर सुनाये जाने की कोशिश की जाती थी।

'पद्मश्री' सम्मान से नवाजे गए थे बशीर बद्र

साहित्य के क्षेत्र में बशीर बद्र के ऐतिहासिक और बेमिसाल योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 'पद्मश्री' जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से नवाजा था। उन्हें साल 1999 में 'पद्मश्री' सम्मान से नवाजा गया। बता दें कि बशीर बद्र का जिक्र शिमला समझौते के मामले को लेकर भी बहुत बार होता है। दरअसल उन्होंने 1972 में शिमला समझौते के दौरान 'दुश्मनी जम कर करो' शीर्षक से एक शेर भी लिखा था, जो भारत के विभाजन पर आधारित है। जिसे भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के तत्कालीन   राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के सामने पढ़ा था। उन्होंने जो कुछ भी लिखा, वो आज इतिहास के पन्नों में दर्ज है।

बशीर बद्र का UP से रहा खास ताल्लुक

बशीर बद्र साहब का उत्तर प्रदेश की धरती बेहद खास ताल्लुक रहा है। दरअसल बशीर बद्र के जीवन का सफर ही यूपी से शुरू हुआ। बशीर बद्र 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जन्मे थे। जहां से उनके तालीमी सफर की भी शुरुवात हुई। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा और पीएचडी की डिग्री पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने इसी विश्वविद्यालय में उर्दू के प्रोफेसर के रूप में लंबे समय तक अपनी सेवाएं भी दीं। वहीं बशीर बद्र की निजी ज़िंदगी में भी कई दर्द और जख्म रहे। उनके लेखन के शब्दों में उस दर्द को समझा भी जा सकता है।

बशीर बद्र के चुनिंदा मशहूर शेर

1- उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

2- दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों

3- कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता

4- न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की

5- हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा

6- मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी
किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी

7- ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं
पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है

8- बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना
जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता

9- जिस दिन से चला हूँ मिरी मंज़िल पे नज़र है
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा

10- कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो

11- यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं
मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे

12- हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं
उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में

13- तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा

14- मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला

15- ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुम ने मिरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा

16- तुम मोहब्बत को खेल कहते हो
हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली

17- लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में

18- अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा

19- परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता,
किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता

20- सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा,
इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा